Satsang notes morning (05aug 2021)

 



5 aug 

- तुम नित्य शुद्ध बुद्ध आत्मा हो यह ज्ञान सद्गुरु ही दे सकते हैं।

- मान्यता का सुख मेरे मेरे का मान्यता ही रिपीट से स्मृति बन रही हैऔर विस्मृति से कितने ही संमंध छूट रहे हैं।

- जैसे सुन्नते है हैं ऐसे ही अपने को मानते हैं। तुम इतने महान हो कि हम बयान नहीं कर सकते। 

- प्रत्यक्ष ज्ञान में भी अज्ञान की प्रभाव है । बुद्धि की योग्यता अनुसार ही जान पाता है। करोड़ो जीवो जो सत्ता, स्फूर्ति, ज्ञान देने वाला तुम हो। 

- नित्य अनित्य और सत वस्तु। 

- कर्तव्य निभाना अच्छा है। पर आत्माज्ञान के बिना 

- में के ज्ञान बिना उच्च लोक या नीच लोक प्राप्त होता रहेगा और जन्म मरण चालू रहेगा।

- बौद्ध धर्म और वेदांत का विवेचन। शून्य को जाननेवाला वो तुम हो।

- भावना का सुख, क्रिया का सुख, समाधि का सुख, निर्विकल्प का सुख का विवेचन।

- श्रोतयव्यम मंतव्यम निदिध्यास्तव्यम आत्मा के विषय मे सुने , मनन करें, और निदिध्यासन करे और उसको जाने।

- सत्यम ज्ञानं अनंतं ब्रह्म

- संसार के लोग अपनी मान्यता अनुसार आपसे संमंध बनाएंगे। पर इस मान्यताओं से  आप भिन्न हो उस को आप जानो।

- मुंड मुंडाए तीन गुण....

- स्वामी गंगा तीर्थ -  मंडलेस्वर और लीलाशाह जी प्रसंग। संसार को मृत्यु सबकुछ छीन लेगी, सदवस्तु का अनुभव आवश्यक है। 

- साक्ष्यतकार प्रत्यक्ष नहीं है साक्षात अपोरोक्ष है।

- सतवस्तु ही चेतन है, अनंत है....

- ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या, जीव ब्रह्मैव न परे....

- स्वामी प्रज्ञानंद और भूल भुलैया प्रसंग.....। सारा जगत भूल भुलैया है।

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  • 5aug
  • अनित्य वस्तु के विश्लेषण में बुद्धि का उपयोग करते हैं जबकि नित्य वस्तु का भान नही
  • अमर वस्तु मर वस्तु के साथ जोड़ देते हैं, की मेरा इतना इतना पसारा है, मान्यता बना रखा है
  • धार्मिक लोगों से सुना तो जीव मान लिया, सम्प्रदा य वालों से सुना तो अमुक जाति का मान लिया, परिवार वालों से सुना तो अपने को किसी का बेटा, पति और बाप मान लिया
  • वेद कहते है कि तुम ब्रह्म हो, अपने को जान लो
  • खाने पीने और बच्चे पैदा करने की बुद्धि तो कीट और पशु में भी होती हैं, मनुष्य जीवन सत वस्तु को पाने के लिए मिला है
  • हम क्या है इसका ज्ञान नही तो मृत्यु के झटके से अनाथ हो जायेगे
  • माना हुआ सत्य मान्यता के साथ जुड़ा होता है, 
  • क्रिया के सुख की अपेक्षा भावना का सुख ऊँचा है, उससे अच्छा सविकल्प समाधि, उससे अच्छा निर्विकल्प समाधि का सुख अच्छा है
  • मनन करके नितद्यसान करें तभी साक्षात्कार होगा
  • सत्य वस्तु का साक्षात्कार नही हुआ, अनुभव नही हुआ तो मृत्यु के झटके से नही बचेंगे
  • सब अनित्य सम्बन्धों का अंत होता है
  • सारा संसार एक भूल भुलया है, फिर भी इसमे फँस रहे है
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5/08/2021
जब तक सत्य में बुद्धि नहीं लगती तब तक भटकते रहते हैं ..
तुम नित्य सत्यात्मा हो ऐसा ज्ञान तो सतगुरुओ से ही मिलता है..
 प्रत्यक्ष में जो ज्ञान दिखता है किंतु जब तक उसको बुद्धि से काम नहीं लेंगे तो वह प्रत्यक्ष भी अप्रत्यक्ष ही लगेगा ....
 क्रिया के सुख से भावना का सुख ऊंचा है..
 एक बार सत वस्तु का ज्ञान हो गया तो फिर अज्ञान नहीं होगा ..
किंतु सत्य स्वरूप आत्मा का ज्ञान हो गया तो वह सदैव रहेगा, पत्नी बच्चे आज है हमेशा नहीं रहेंगे किंतु सत्य स्वरूप आत्मा का ज्ञान सदैव टिका रहेगा ..
अपने को जान लिया तो सदा के लिए सारे दुख मिट जाएंगे ...
नित्य और अनित्य  दोनों से  परे वस्तु दोनों से परे वस्तु सत्य वस्तु होती है सत्य वस्तु चेतन है, ज्ञान स्वरूप है ,उसकी कोई सीमा नहीं है वह सत्य ही है वह ज्ञान स्वरूप है उसी से सब बन जाता है

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source - audio- find here 


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