Satsang notes morning (12aug 2021)
12 aug
अकबर बीरबल प्रसंग(दो अबके दो तबके ….)
ठग और सेठ प्रसंग….
जो मुझे भारत भोक्ता समझता हैंवो मुझसे न दूर है न में उनसे दूर हूँ।
ब्रह्मांड में में का फैलादो। तो सारा ब्रम्हांड अपना रूप भासेगा।
भोजन जाजन …..
जा लगी आत्मतत्व चिन्हयो नहीं त लगी साधना सर्व झूठी।
शुक त्यागी कृष्ण भोगी जनक राघव नरेंद्र, बशिष्ठ कर्मनिष्ठस्च सर्वेषाम समान मुक्ता।
हर्ष शोक व्यापे नहीं बैरी मीत समान
हम लोग अपने से इतना दूर हैं कि पहुंचने में युगों बीत जाता है। ज्ञनि के लिए में प्रत्यक्ष है।
14 इंद्र ब्रह्मा के एक दिन में बदलते हैं ऐसे ब्रह्माजी 100 साल तक जीते हैं।
12 aug
बाहर के विषयों में सुख नही मिलता अपने आप में ही सुख होता है… ..
नोकर द्वारा सेठ के पास धन ढुढना… ..
चाँदना तु चांद सारे जहां का, तेरे आसरे होय व्यवहार सारा…
ज्ञानी को कर्तव्य की प्रवर्ती नही होती, सब सहज में होने लगता हैं… ..
हर्ष शोक व्याप्पे नही सबसे सहज स्वभाव… .
शुक् त्यागी ,कृष्ण भोगी… . .
साधरण जीव अनुकूलता में फूल जाते है और प्रतिकुलता मे सिकुड़ जाते हैं
किसी महापुरुष में गलती दिखती है तो हमारा दुर्भाग्य है उन्हें क्या करना चाहिए नही बल्कि हमारा नजरिया कैसा होना चाहिए… .
Yv आत्म सता ही त्रिकुटी (दृष्टा दृश्य,दर्शन) होकर भासती है दूसरा कोई नहीं
आत्मा के अज्ञान से राग द्वेष होता है, ज्ञान होने से ये नष्ट हो जाता हैं

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