Satsang notes morning (03aug 2021)
3 Aug
- सबकी पूजा का मूल में सर्व व्यापक महेश्वर को लक्ष्य करें।
- ईश्वर की एड्रेस । (जप, स्मृति, विश्रान्ति)
- उस महेश्वर को आप पा सकते हो आप मे योग्यता है, इसलिए मनुष्य जन्म मिला है।
- रावण बुद्धिमान था पर शरीर को में मानता था।
- सत्य, मिथ्या, असत्य विवेचन
- सत्य ज्ञानं अनंतं ब्रह्म .....
- भगवांनकी गोद मे जाने के बाद डर चिंता भय किस बाद कि ? भगवान की गोद ॐ आनंद, ॐ शांति, ॐ माधुर्य, ॐ.....स्वशोस्वाश।
- ख़िदयोपि न खिद्यते , रुष्टयोपि न रुष्टयते, ब्रह्म ज्ञनि का लक्षण....
- पृथ्वीराज कुमावत पत्थर के अंदर कीड़ा के प्रसंग।
- जितने बड़े से आप का अपना पन होगा उतना ही आप का बड़ा उपलब्धि होगी।
- ज्ञान के बिना भोग नहीं। ज्ञान का मूल वही चैतन्य है।
- वो है सत चित्त ज्ञान बिभु सबसे छोटा और बड़ा
- अखिल ब्रह्मांड में एक तू श्री हरि....
- नष्ट मोह स्मृति लब्ध्वा .....
- स्नातम तेन सर्व तीर्थम दातं तेन सर्व दानं, कृतं तेन यज्ञम क्षण ब्रह्म विचारे स्थिरकृत
- आप गुरुजी से भी बड़े भाग्यशाली है....
- राम न सके रामगुण गाही। गाते गाते चुप हो जाओ निःसंकल्प अवस्था।
- तेरी मर्जी पुरण हो.....
- yv. आत्मामें जगत भ्रांति मात्र है।
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3 aug
- सम्बन्ध और वस्तु मरते भी और बेवफाई भी करते हैं, ईश्वर ना मरते हैं ना बिछड़ ते हैं और बेवफाई भी नहीं करते
- भगवान को अपना मानिय,,,
- अच्छा बुरा काम हमसे छुट् जाता हैं, भगवान नही छुटते
- प्राणीमात्र के सुहृद है, चाहे कोई माने ना माने सबका हित करते है
- माँ और गुरू में प्रेम और सहनशीलता ईश्वर की है
- जिसका शुरू और बाद नही होता वो सत्य जो पहले नही था बाद में नही रहेगा वो असत्य है
- पत्थर मे चीरा तो किडि और शक्कर निकलने पर, परम प्रभाव से प्रभावित होकर नाथ सम्प्रदाय की दीक्षा ले लेना
- अच्छे बुरे का चिंतन ना करे, उसके ऊपर छोड़ दो, तेरी मर्जी पूरण हो,,

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