Satsang notes morning (04aug 2021)


4 aug

-( ......वो कौन है।)

- सबकुछ बदलते हुए भी जो अबदल है वो कौन है। 

- बाकी सब को जानने के बाद भी उसको को न जानो तो कुछ नहीं जाना।

- ईश्वर कौन है? भूताकाश से बड़ा चित्ताकाश से बड़ा चिदाकाश स्वरूप है आत्मा परमात्मा।

- जो भी कुछ करते हैं सब सुख के लिए करते हैं ।

- अर्जुन को कृष्ण मिलने के बाद, राम जी हनुम्मान जी को मिलने के बाद भी दुख नन्हीं मिटा। सदुपदेश से ही मिटा। 

- अपना आपा ही सुख रूप है, आनंद रूप है, शाश्वत है।

- मन बुद्धि आदि के बदलाब को कौन जानता है।

- मेरे गुरु चिदाकाश रूप है। सर्वं धर्मम परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। 

- सभी देवों के रूप में में ही हूँ ।

- तस्य तुलना केन जायते? ख़िदयोपि न खिद्यते, रुष्टयोपि न रुष्टयते.....

- अपन नहिं मरेंगे, शरीर नहीं टिकेगा।

- दिन में करोड़ कमाओ फिर भी सत्संग का त्याग न करें।

- हेलीकॉप्टर दुर्घटना और आत्मदेव प्रसंग।

- उदेपुर राणा चतुरुषी प्रसंग, भूरीबाई प्रसंग, शिवाजी के साक्षात्कार प्रसंग

- ज्ञानवान के आगे सभी देवता बबलू हो जाते हैं।

- हर्ष शोक में न फॅसे समय बिगाड़ते हैं।

- अशुद्धि भोजन न करें , संपर्क से बचें।

- yv पुरुषार्थ वही है के प्रयत्नंपूर्वक सत्संग करना।

- ज्ञानी तृष्णा के लिए यत्न नहीं करते है। 

- जड़रूप अविद्या से संसार बना है और चेतन से अभिन्न होते हुए भिन्न होकर भासता है।


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  • 4 aug
  • संसार में जितनी भी दौड़ धुप करते है, अपने से मिलना और द्वेष वाले से दूर रहना ये सब किसके लिए करते हैं
  • भुत आकाश को जानने वाला चित आकाश और इसे जानने वाला चिदा काश… 
  • प्रलय भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता इसे आत्म ज्ञान कहते है
  • खाते पिते, संसार व्यवहार करते हुए भी देखो, करने वाला कोन,,, तो आत्म ज्ञान हो जायेगा
  • कभी ना छूटे पिंड दुखों से जिसे ब्रह्म का ज्ञान नही
  • बाहर का कितना भी कीमती हो संभाल कर नही रख सकते
  • उदयपुर के राजा चतुर सिंह का सत्संग में आना और चुपके से निकल जाना, जो अच्छी बात होती उसका अकेले में बार बार चिंतन करके ह्रदयस्थ करना
  • जहाँ चाह वहां राह,,, अपनी आत्मा को पाने की चाह बना लो
  • सूख दुख परेशान करते है उन्हें देखने का मजा ले उनमें फंसे नही
  • सात्विक भोजन करें, मासिक वाले कै हाथ का नही खाना
  • जाके प्रिय ना राम वैदेही, तजिये वेरी कोटि , यधपि परम स्नेही
  • जिनके संपर्क से हमारी श्रद्धां भक्ति घटे उन्हें दूर से ही त्याग दे
  • जो शास्त्र के अनुसार विचरते है वे सदा सम और प्रसन्न रहते है
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हरि ॐ 🙏 
4 अगस्त 2021
सब कुछ बदलते हुए भी जो बदला नहीं जा सके वह कौन है...
बाकी  सब को जानने के बाद भी उसको न जानो तो कुछ भी नहीं जाना....
 हम जो कुछ भी करते हैं सभी सुख के लिए ही करते हैं ..
राजी ,नाराजी मन की होती है  सुख भाव को दुख भाव को जानते हैं...
 शरीर बुद्धि एवं  अहम बदला, जो नहीं बदला उसकी कितनी महानता है..😌 🙏
सर्वोपरि ज्ञान ही आत्मज्ञान है ....
दुख आया तो मन को आया विकार आया तो इंद्री को आया ...
पत्नी मिले तब सुखी, पति मिले तब सुखी ....
अपना आपा ही सब सुख दुख है अपने आपकी सत्ता से ही  वाणी चलती है ...
जब तक आत्म देव का ज्ञान नहीं होगा ,तब तक दुखों से पीछे नहीं छूटेगा....
 1 दिन में करोड़ों कमाओ ,फिर भी सत्संग का त्याग ना करें 🙏 अपनी आत्मा को जानने की चाह बना लो ...
जीभ मन, बुद्धि के निर्णय को जो बदलता है वह आत्मदेव है ...
हर्ष शोक तुम्हारे को उल्लू बनाते हैं ..
दुख: आये तो दुखी ना हो, सुख आए तो सुखी ना हो...
 हम हर परिस्थितियों के बाप हैं.
विवेक व सयम से दोनो पल कट जाते है ...
  सात्विक भोजन करना चाहिए 
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source - audio- find here  

 

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