Satsang notes morning (06aug 2021)
6 aug
में कौन हूँ । इतना ही जान लो बस जीबन के सारे कार्य पूर्ण हो जाएगा।
ईश्वर भजन में लग जाओ बाकी सब ठीक हो जाएगा। (अलसी होकर बैठना भजनं नहीं , सतत चिंतन और ईश्वर परायण होना ही भजन है)
जगत को इतना महत्व न दो की जगादिस्वर को ही भूल जाओ
सब मुझ में है और सब मे में में हु , और नहीं भी। सब मे हैं और नहीं भी। विश्लेषण
तुम अपनी महिमा में जागो….
ब्राह्मी स्थिति वर्णन….
आंख बंद कर सत्संग सुनना भारी पाप है। दादागुरु की डांट प्रसंग...
ईश्वर दर्शन से भी परमात्माअनुभव करना बहुत ऊंची स्थिति है।
प्रचेता शिव जी नारायण नारद जी से सत्संग प्रसंग।
सिद्धियां बाले बात सुन कर दादागुरु से डांट खाना प्रसंग
मौलाना जलालुदीन रोमी प्रसंग (गुरु सम स्तब्रेज)
….भरोसा करना ही पड़ेगा। ईश्वर को पाना हो तो गुरु पर भरोसा करना ही पड़ेगा।
गुरु दर्शन। परम सुख दायी प्रसंग
भगवान अपनो महिमा में जागे हैं उस गुरु देव के शरीर का पूजन करें। ….आप ही आत्मज्ञानी हो जाओ।(बापूजी चाहते हैं)
चंद्रमा और सूर्य का जगह कोई नहीं ले सकता। इस तरह गुरु की जगह कोई नहीं ले सकता।
ब्रह्मज्ञानी के आगे सब लघु हो जाते हैं।
तीन टूक कौपीन की भाजी बिना लून तुलसी हृदय रघुवीर बसे तो इंद्र बापड़ा कोण।
ब्रह्मा विष्णु महेश जहां स्थित होते है वहीं ब्रह्म वेत्ता स्थित होते हैं।
ब्रह्म हत्या से भी ज्ञनि को पाप नहीं लगता। और बड़े पुण्य कार्य से भी पुण्य भी नहीं होता।
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6aug
मेरो चिंन्तयो होत नही, हरि को चिंन्तयो होत
हरि चिंन्तयो हरि करे, मै रहु निश्चिंत
सत्संग के समय आँख बंद ना करे
पूर्ण गुरु मिले तो और को प्रणाम किया ना किया
हजरत सुल्तान - गुरू कृपा से वो मै और मै वो हो गया, दोनों का द्वेत मिट गया
अपने से कई जगह ऊँचे हो वही मत्था टिकता है
जिसने संसार को त्रणवत समझ कर त्याग दिया उसकी तुलना किससे करोगे, उसके समान कोई नही
तीन टुक कोपिन की, भाजी बिना लुण
तुलसी ह्रदय रघुवीर बसे, तो इन्द्र बापडा कुण
ज्ञानी का प्रकट आकार भासता हैं पर ह्रदय में अहम भाव नहीं रहता
भोग की वासना वाले को दिन देखकर ज्ञानी को दया आती है
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हरि ओम 🙏
06/08/2021, शुक्रवार
तुम हो अपने आप हर परिस्थितियों के बाप....
सत्संग के समय आंखें बंद ना करें..
वक्ता के सामने भी देखना चाहिए....
संतो से मिलने से जीवन में बहुत उन्नति होती है....
कबीर जी ने कहा - संतो के बार बार दर्शन करना चाहिए..
वायुयान में यात्रा करनी हो तो पायलट पर भरोसा करना होगा ,बस में यात्रा करनी है तो ड्राइवर पर भरोसा करना होगा, नाव में यात्रा करनी हो तो नाविक पर भरोसा करना होगा,और ईश्वर प्राप्ति करनी हो तो सद्गुरु पर विश्वास करना ही पड़ेगा....
हजरत सुल्तान का प्रसंग- काश मेरे तन के एक -एक रोम को लाख लाख आँखे हो ताकि मैं सभी आंखों से गुरुदेव के दर्शन करु...
गुरुदेव की जगह हर कोई व्यक्ति नहीं ले सकता..
उस ब्रह्मज्ञानी की तुलना किससे करोगे उसके समान कोइ बाट ही नही है ....🙏
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