Satsang notes morning (07aug 2021)

 

7 aug

हालीपाओं और गोरखनाथ  जी प्रसंग। जो मन मे आये वो न करे। सूक्ष्म मन की स्वामी। 84 सिद्ध में से एक। 

अच्छा है उसको करें जो बुरा है उसको छोड़ें। नियम ले ले। ठान ले नियम ले ले। आत्मशक्ति बढ़ेगा।

मुनीम से बुरा चीज करने से सेठ पर भारी प्रसंग।

मन के अनुसार चलेंगे तो मन हमारे ऊपर हावी होगा। गलत काम कराएगा।

मन के साथ खेलो। दादागुरु की प्रसंग (रोटी खिलाना, पीहू)

प्रकृति में परिवर्तन से मन मे पकड़ हो तो दुख होता है।

रंग अवधूत महाराज। नाटकिनी बाईडी प्रसंग।

रामतीर्थ और इंडियन मोंकी प्रसंग

मन से जो परे जो होजाते हैं वो पार हो जाते हैं।

जब कोई परेशानी हो तो अपने मे आजाएँ या मन को बदल दें।

राजाबाबू प्रसंग। ( उठो, समय किसीके बाट नहीं देखता, जंगल में जाना)

कंगाल से कंगाल भी कुछ न कुछ छोड़ के जाता है।

जो आनंद ब्रह्मा विष्णु शिव लेते हैं वो आप भी पा सकते हो।

जो ब्रह्मा जी बनना चाहते हैं ऐसे ही बन जाता है। उसके लिए धीरज और पुरुषार्थ चाहिए।  आत्मपद सर्वोपरि उसको ही पाने की प्रयत्न करें।

राजा बनना हो तो जूझना पड़ता है। ऐसे ही ईश्वर पाना हो तो पुरुषार्थ करें।

बारम्बार आत्म बिचार से जो कल्याण होता है मातापिता बंधु नहीं कर सकते हैं।

जैसे आकाश को कोई स्पर्श नहीं करता ऐसे आप भी निर्लेप रहो।

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7 aug

जो मन में आये वो मत करना गोरख नाथ जी का, हल जोतते किसान को उपदेश

जिसको हम अच्छा मानते है और शुभ कर्म हो, जप ध्यान उसे पुरा करें और जो अशुभ हो उसे नही करने का ठान ले तो आत्म शक्ति बढ़ जायेंगी

सेठ और मुनीम का प्रसंग, जब मन के अनुसार चलते हैं तो नुकसान होगा

सात्विक चिंतन, सात्विक भोजन करें, भोजन से पहले खुश रहे

हाय रे मेरे साथ बुरा हो गया,, नही परिवर्तन होता है

रंग अवधुत जी महाराज की हेंट और रामतीर्थ जी को monkey कहके लड़कों द्वारा मजाक करना और उन महापुरुष का भी उसमें मजा लेना

राजा बाबू का प्रसंग,,, समय बीत जायेगा, अपनी आत्मा में जगो

ऐसी कोई चिज नही जो अभ्यास से नही मिले, जो दुनिया में नही है फिर भी अभ्यास करे तो तुम्हारे लिए बन जायेगा, बस अभ्यास नही छोड़ें

पाना है ईश्वर को और शास्त्र व गुरु से मुंह मोड़ता है तो क्या खाक पाऐगा

आत्मपद का बार बार विचार करें


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7/08/2021, शनिवार 


 अच्छी बात को ठान ले, और उसे पूरा करें ....

बुरी बात को छोड़ दे .. 

इससे आत्मशाक्ति का विकास होगा ......

मन से हम गलत करते हैं, तो मन हमारी कमजोरी जान लेता है ..

मन ही बंधन ,मुक्ति का कारण है ..

मन की वृत्ति को शुद्ध करें  ....

सात्विक भोजन, सात्विक चिंतन से मन शुद्ध होता है ....

मैं शाश्वत हूं ,मन बदलने वाला है ....

मन में परिवर्तन होता है, प्रकृति में परिवर्तन होता है जो मन से अपने को अलग मान लेते हैं वे चिंता पाप दुखो से दूर हो जाते हैं ....

युक्ति से मुक्ति होती है ....

आत्मज्ञान से सारे गुण विकसित होते हैं....

 सत्संग बार बार सुनने से मन शुद्ध होता है....

 परमात्मा को पाने के लिए  नियमित  प्रयास करना चाहिए ..

पुरुषार्थ से ही परमात्मा की प्राप्ति होगी ....

इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है ईश्वर को पाना है तो ईमानदारी से ईश्वर की ओर चलना पड़ेगा ....

आत्मविचार करने से जो कल्याण होगा, ऐसा कल्याण माता-पिता ,तीर्थ,  धन -दौलत से भी नही होगा ।


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source - audio- find here 

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