Satsang notes morning (10aug 2021)



10 aug

  • परमात्मा सुख पाने कीचीज है, संसारी सुख बांटने की चीज है।

  • संसार सुख की लालच से दुख और भय नहीं मिटता है।

  • सत्शिष्य के लिए परमात्मा प्राप्ति सरल है। आज्ञा पालन से सुख की आसक्ति मिटती है। आज्ञा सम नहीं सेवा। कर्तव्य का महत्व प्रसंग।

  • बाहर से सुख लेने की इच्छा ही दुःख का मूल है। गरीवी, अनपढ़, बीमार, होना दुख का मूल नहीं है।

  • रोज सुबह संकल्प ले - संसार सुख नहीं लेंगे अपितु बाटेंगे। परमात्मा सुख की और बृत्ति को ले जाएंगे।

  • संसार की सुख की लोलुपता त्याग करेंगे। तो भागवत सुख के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।

  • अंतर सुख के तरफ जाते ही संयम सदाचारी बन जाएंगे ।

  • अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश जुहोमि स्वाहा। सुबह जरूर करो और प्रतिदिन कईबार करो।

  • उड़िया बाबा और प्रेत का प्रसंग। पैसे चुराना और अशांति होना….

  • जैसे सपना रेन का ऐसा ये संसार। छोड़ छोड़ जात है देह गेह धन राज। संसार सुख का त्याग करें।

  • किसी से राग नहीं द्वेष नहीं कर्तव्य बुद्धि से धन की राज की व्यवस्था करें। संसार सुख बुद्धि का त्याग करें।

  • ….कब मौत आजाएगा पता नहीं, वहां क्यों बैठेहो। जहां मौत की दुख की दाल नहीं गलती वहाँ क्यों नहीं चलेजाते।

  • वशिष्ठ ऋषि डेढ़ लाख साल चैवन ऋषि साठ हजार साल जिये थे। फिर भी अपने चित्त को शांत करने में ही सार दिखे।

  • परमात्मा पाना कठिन नहीं है पाने की इरादा पक्का करो।

  • अशुभ को अशुभ सुबह को शुभ जानलो।

  • पंडित के लिए ईश्वर प्राप्ति लंबा सत्शिष्य के लिए सरल रास्ता है।

  • संवेदन के स्फुरण पलटना है। जो विचार बाहर घसीटता उसके अंदर पलटो।

  • जितना दुख से भला होता है सुख से नहीं। ईश्वर के सिवाय कहीं भी मन लगाओ अंत मे रोना ही पड़ेगा।

  • इस घोर दुख क्लेश के युग मे भी आप मजे में हो क्यों कि सत्संग का प्रभाव है। नहीं तो इस कलह युग मे इतना शांत नहीं होते। इसलिए सद्गुरु का बड़ा उपकार माने।

  • जिसने ईश्वर छोड़ संसार की और गया उसे दुख ही दुख मिलेगा।

  • कविरा संसार कि दोस्ति दो बाजू जंजाल । रीझे तो मुंह चाटे, खीजे तो पैर काटे।


  • 10 aug

  • संसार से सुख लेने की वासना दुख देती हैं…

  • संसारी सुख बाटने के लिए होता है और ईश्वरीय सुख अपने लिय होता है… 

  • धर्म का आचरण करे दूसरे का हक ना छीने… 

  • साधन करें चाहे ना करें पर असाधन नही करें… 

  • कर्तव्य का महत्व रखें, बाहर से सुख लेने का महत्व नही हो, 

  • सुख लेने की इच्छा ही दुःख का मूल है

  • सुबह निर्णय ले बाहर से सुख लेने की इच्छा का त्याग करता हूं, अंतर आत्मा के सुख में तृप्त रहेगें, सुख की लोलुपता का त्याग करेगे,,, अविद्या, राग जूहोमी स्वाहा… 5 आहूति

  • संसार के सुख का आकर्षण छूटेगा तो भगवद् सुख बड़ेगा

  • क्या करिय क्या जोड़िय थोड़े जीवन काज… . 

  • किसी के लिए राग -द्वेश नही तो निर्दुख हो जायेगे… 

  • जिसको रख नही सकते उनकी गुलामी नही छोड़ते जिसको कभी छोड़ नही सकते उसका ज्ञान नही… .

  • एक एक दिन बीत रहा है मौत कब गला दबा दे पता नहीं फिर भी निश्चिन्त बैठे है, अपने स्वरूप का पता कब लगायेगे

  • चित शांत करके अपने आप में आने के सिवा और कोई उपाय नहीं 

  • परमात्मा कठिन नही पाने का भाव नहीं होता इसलिय कठिन लगता हैं

  • जो विचार संसार में घसीट रहा है उसे मोड़ कर ईश्वर की और ले आओ

  • सुख से आसक्ति बढ़ती है और दुख से विवेक जगता है, दुख का धन्यवाद करना चाहिए

  • बाहर का सुख कितना भी हो अंदर के सुख का विस्मरण नही होना चाहिए तो दुःख, दुख रहेगा ही नही,

  • बाहर का सुख किसी का रहा नही चाहे रामजी हो या कृष्ण 

  • ईश्वर के सिवा कही भी मन लगाया तो अन्त में रोना ही पड़ेगा

  • जिसने सत्संग और सत शास्त्र का ज्ञान त्याग दिया उसे संसार ने दुख ही दिया है

  • कबीरा कुत्ते की दोस्ती दो बाजू झंझाल, रीझे तो मुंह चाटे, खीझे तो पेर काटे


Comments

Popular posts from this blog

Satsang notes morning (13aug 2021)

Satsang notes morning (12aug 2021)

Satsang notes morning (05aug 2021)