Satsang notes morning (11aug 2021)
- 11 aug
- राजा और बकरी हरा घास प्रसंग। जहां आसक्ति है वहां से धड़ाक करदे। रामतीर्थ निम्बू प्रसंग।
- विवेक से आकर्षण को छोड़ो। कुसंग छोड़ो सत्संग भरो। प्रभु वही अबदल है।
- यह उन्नति का युग नहीं दुख का युग है। सज्जन और संत ही शोषण से छुड़ाते हैं।
- सज्जन इसलोक पर संत इसलोक और परलोक दोनों में कल्याण करते हैं।
- अघुम आत्मा में ध्यान नहीं है इसलिए दुखिया है। नानक दुखिया सब संसार।
- जो छोटे से छोटा है वही बाद से भी बड़ा भी वही परमात्मा है।
- एक राम घट घट में बोले।…..
- दुनिया मे जो कुछ आध्यामिक उत्कर्ष हुआ भारत का ही योग दान है। हिन्दू में श्रद्धा, सेवा आदि सभी गुणों का समावेश है।
- सब दुःखों का एक दवाई …..
- नेहरू, इंदिरा, अखंडानंद, आनंद मयी मां, तिनखा बाबा, पांच तत्त्व का विकास प्रसंग
- जैसे मां पूरे का पूरा बच्चा के लिए है। ऐसे ही परमात्मा जीवात्मा के लिए है।
- अमीर गरीब सभी छोड़ छोड़ के मरेंगे। अतः अछुट परमात्मा को जाने।
- सत चित्त आनंद स्वरूप है परमात्मा वर्णन
- -----------11 aug
- बकरे को हरा घास खिलाना और ऊपर से चोट मारना
- जहाँ जहां आकर्षण हो वही चोट करना चाहिए
- स्वामी राम तीर्थ जी का नींबू के प्रति, इच्छा को पुरी करने से वो तबाह कर देती हैं या तो उस पर चोट करें या विवेक से उसका आकर्षण छोड़ दे कि इतना किया तो क्या मिला, फ़ालतु चिंतन छोड़ें सत्संग का चिंतन करें,
- सत्संग तो करें पर कुसंग का त्याग नही हुआ तो यात्रा लम्बी हो जाती हैं
- एहिक शोषण …. गरीबी, बिमारी
- परमार्थिक शोषण… रूप लावण्य भौतिक सुख सुविधा में फँस कर ईश्वर का त्याग करना
- संध्या के समय ध्यान भजन करें तो उन्नति होगी
- जिस शरीर को इतना संभालते है, लेकिन उसकी राख ही होना है, इससे हमें क्या मिलेगा, जब तक ये रहे तब तक ध्यान भजन सत्कर्म करके इसका फायदा ले
source - audio satsang - find here

Comments
Post a Comment