Satsang notes morning (14aug 2021)



14 aug

  • हास्य विनोद भागवत स्मृति के लिए करें , न कि झगड़े पैदा करें।

  • संसार से जो पार नहीं हुआ आत्मा को नहीं पाया उसको संसार ले डूबेगा।

  • जिसके जीवन मे आध्यत्मिक सुख हो उसको संसार तपा नहीं सकता।

  • संसार को जो तैरना नहीं जानता है उसको यह संसयR तपा कर मार डालता है।

  • निंदा 

  • निंदा स्तुति राग द्वेष करना माह मूर्खता है।

  • संसार को सच्चा मानना सहरीर को में मानना  ही राग द्वेष पैदा करता है।

  • आसक्ति हो तो मेरे गए।

  • हिरण्यकशिपु बड़ी पुरुषार्थ वाला था पर मेरा चले मेरेको माने यह उसको ले डूबा। हम बने रहे और हमारा बनिरहे उसको।

  • राम वही रावण को तीर लगाते और शबरी के 

  • जो निर्बसिनिक तत्व में टिक जाता है उसके लिए सारा संसार खेल मात्रा है। ब्राह्मी स्थिति बराबरी और कोई स्थिति नहीं। ज्ञान मुद्रा, मूलबन्ध, ॐ गुंजन, त्राटक, 

  • तृप्ति अपनी आप मे आती है।

  • इंद्र और बृहस्पति है। 

  • गुरु जी को एकांत बिघ्न डालना पाप है।

  • गहनों कर्मणा गति।

  • ब्रह्माजी के एक दिन के आकलन। गंगाजी के रेती गिन सकते हैं पर सृष्टि में किते ब्रह्माजी हुए गिनती नहीं कर सकते हैं।

  • राजा अज अजगर, नृग किरकिट, इंद्र की कीड़े प्रसंग

  • बुद्धि योग उपाश्रित्य मतचित्त सततं भवः।

  • सक्ष्यतकार करना कठिन नहीं है। परीक्षित 7 दिन में सुकृताल में उपदेश।

  • उदयपुर राणा चतुरुषी, सत्संग चोरी, ब्राह्मी स्थिति प्रसंग। भूरी बाई प्रसंग। 


14 aug

 निर्वासनीक व्यक्ति की योगयता बहुत होती हैं

अपनी कमी निकालते जाये तो गुण अपने आप प्रकट होगे

गुरू को विघ्न डालने से पुण्य नाश होते है

इन्द्र के गुरू और इन्द्र का प्रसंग, जीव की बासना उसे काल चक्र में फंसा देती हैं

बालू के दाने गिने जा सकते है पर कितने ब्रह्मा विष्णु महेश हो गये कुछ पता नहीं

जीवन में अनंत विचार, अनंत स्थिति आई और चली गयी पर उन्हें जानने वाला मै वहीं का वहीं

नकली मै को सच्चा मानते है तो काम क्रोध लोभ प्रकट हो जाते हैं तो असली मैं को प्रकट करने के लिए नकली मैं को पोसना बंद कर दे

चित छोटी छोटी चीजो मे बटा हुआ है इसलिय ब्रह्मा कार व्रति नही हो पाती

शरीर से खाना ,पीना ,देखना ,सुनना सब मजा दूसरों के हित में हो, अपने लिय परमात्मा हो

उदयपूर के राजा चतुर सिंह सत्संग की बात को चुरा कर ले जाते और फिर शांत होकर बार बार उसका चिंतन मनन करते  ताकि वो बात गहरी हो जाये

गुरु को ब्रह्म स्वरूप करके जो ध्यान करते हैं उनके आगे दुनिया के नाच- गान वाले का मजा कुछ भी नहीं

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Jo chodkar jana h uske piche lage huye h

Ghar m jo bhojan mile kha lo

Jo kapde mile pehan lo 

Jaha jagah mile so jao


Apka akal mata aise upjega ki uske age indra ka vaibhav uske age tuchh ho jayega

Tin tuk koupin ki

Bhaji bin lun 

Tulsi hriday 

Toh indra bapda koun

Sharir sath dega nhi parmatma sath chodega nhi 


Jo kabhi sath n chodo use kahate h parmatma

Aur jo sath nhi dega woh sansar 


Logon ka khun piya toh khatmal banoge 


Bahut pasara mat karo kar thode k as...

Pada rahega mal khajana..


Mat kar re garv guman ...


Sunega gyan yog...


8 prakar ka dan 

Ann 

Bhumi 

Suvarn 

Gou dan 

Gou ras 

Vidya 


Sabse bada abhay dan 

Sat chit ananad


*Apni akal badhao sat chit anand ko badhao*


Asali swabhav sat h mane satta jo kabhi n mite 

2 prakar ki 

Ishwar

 jiv 


Jivatma aur paramatma ki anandata

Satata 

Chetanata


Jagrut h tabhi tu h 

Jagrut gaya sapna aya tabhi tu h 


Tu sat h abadal h


Pure badalhat ko dekhane wala h tu 


Asat sharir ko mai mante h usase judi huyi chijon ko apna manate 

Toh musibaton ka pariwar ajata h


Janam janam par mat phiro


Sangi sathi ..

Ek ek raghunath


source - audio satsang - find here 




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