Satsang notes morning (15aug 2021)
15 aug
दुसरो की बुराई सोचने से सोचने वाले के ही बुराई होती है।
कर्म योगी , भक्ति योगी की भर्ती
आश्रम की सेवा और सुविधा
निस्वार्थ सेवा करें
मूलबन्द की साधना
एकाग्रता और अनासक्ति की बढ़ानेवाली साहित्य, और संग करें
मलिन वातावरण से सावधान रहें।
दिखावटी पन के संग से अपना पतन न करें।
गुरु दरबार से नस्वर नहीं सास्वत की लाश रखें।
शास्त्र और गुरु के सिद्धान में रहें।
लक्ष्य न ओझल होने पाए …..
गुरु आश्रम में चतुराई न करें
चतुराई चूल्हे पड़ी….
परमात्मा को प्राप्त की लाश राहखो।
जो निष्काम सेवा करता है वो मुक्त हो जाता है।
आस्तिक भावना राखब
गुरुजी की डांट के की गलत अर्थ न ले ।
अज्ञानी देह को में मानता है और जगत को सच्चा मानता है। इसलिए दुखी है।
आत्माज्ञान ही सारे खतरों
चंचलता से विक्षेप, इसहवार को अलग मानता ही।
धर्मात्मा, योगी, भोगी संसार को सच्चा मानने से दुख से रहित न होगा।
प्रकाशम च प्रवृत्ति
तीन सीधांत वासुदेव सर्वमिति, कोई सेवा छोटा नहीं है।
योग मतलब अपने स्वरूप के स्थिति होने चाहिए।
अन्तःकरण - बही करण - विवेचन। उसको जो जनता है वही योगी है।
मोह कभी न ठग सके…….// पूर्ण गुरु किरपा मिली पूर्णनगुरु का ज्ञान।
राम वनवास प्रासांग लक्ष्मण की क्रोध प्रसंग।
यस्य ज्ञानयम तपः।
ज्ञान की बात करें आकर्षण नहीं। विपरीत परिस्थिति में समता में नहीं टिक पाएगी।
अभ्यास योग युक्तेन चेतसा न अन्य गामीनः।
Yv- देह को अपना रूप मानना मूर्खता है।
ज्ञानवान को कर्म बंधन नहीं करते हैं।
तुम्हारा रूप साक्षी रूप चैतन्य है।
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