Satsang notes morning (16 aug 2021)
16 aug
मुर्गी के बच्चे का प्रसंग…
हमें भी जन्म जात संस्कार इस संसार के पड़े है, इसलिय असली माँ परमात्मा की और ना जाकर बतख रूपी संसार की और चोट मिलने के बाद भी जाते है
कामना त्याग और भोग का जब मौका आता है तो हम भोग की तरफ़ चले जाते है
सप्रहा वासना ममता की तरफ जा रहे है…
हे प्रभु ! आपने सदियो से पाला है जन्म दिया है फिर भी हम बतख रूपी संसार की तरफ भागे जा रहे हैं, हमें संसार से बचा कर आत्मा की ओर ले चल, हम मे सामर्थ्य नही तु जबरन ले चल, हमें संसार रूपी बतख की चोच खाने की आदत पड़ गई…
हम अपनी आत्मा को ना जानकर संसार की कामना को जानने में लग जाते हैं इसलिय जन्म मरण हो रहा है
वो परमात्मा सबके दिल में एक जेसा रहता है, चाहे वशिष्ठ, जनक, एक नाथ जी, परमात्मा प्राप्ति मे एक समानता है विषमता नही, जबकि संसार के भोगों मे समता नही विषमता होती है
जो चित की कामना के अनुसार चलता है उसे मुढ, जो कामना को रोकता है उसे त्यागी कहते है
भाग्य को संसार और रूपयो के साथ मत जोड़ो ब्रह्म के साथ जोड़ दो
जो छोड़ना है उसे पकड़ रहा है और जो संभालना है उसे छोड़ रहा है वो मुढ है
जब भोगों की वासना का भाव से त्याग करोगे तो बिना यत्न के भोग छुट् जायेगे
source - audio satsang - find here
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